भारतीय रेलवे (Indian Railways) रोजाना लाखों लोगों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने का काम करता है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हमारे देश में कुल 8338 रेलवे स्टेशन है, जो पूरे देश में फैले हुए हैं. इन रेलवे स्टेशनों में कई बेहद अजीबोगरीब नाम वाले रेलवे स्टेशन भी हैं. अपने इस लेख में हम आपको देश के सबसे बड़े और छोटे नाम वाले रेलवे स्टेशन के बारे में बताएंगे. सबसे बड़े नाम वाले रेलवे स्टेशन की स्पेलिंग में 28 अंग्रेजी अक्षर आते हैं. चलिए जानते हैं.

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र का एक अनोखा गांव, घर में बच्चों के साथ खेलते-पलते हैं सांप

जी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, देश का सबसे बड़े नाम वाला रेलवे स्टेशन Venkatanarasimharajuvaripeta है. इसकी स्पेलिंग में कुल 28 अंग्रेजी अक्षर हैं. ये स्टेशन आंध्र प्रदेश में है. ये तमिलनाडु के बॉर्डर से सटा हुआ है. स्थानीय लोग आमतौर पर इसके नाम से पहले उपसर्ग ‘श्री’ जोड़ते हैं जिससे ये और तीन अक्षर लंबा हो जाता है. सोशल मीडिया पर इस रेलवे स्टेशन की फोटो खूब वायरल होती है. अगर आपको भी कभी मौका मिले तो यहां जरूर जाइए.

यह भी पढ़ें: देश के इस मंदिर में रहते हैं हजारों बंदर, जानें इसके पीछे की रहस्यमयी वजह

चलिए अब आपको देश के सबसे छोटे रेलवे स्टेशन के नाम के बारे में बताते हैं यह रेलवे स्टेशन उड़ीसा में स्थित है इसका नाम ‘Ib’ है. इस स्टेशन का नाम तो शुरू होते ही खत्म हो जाता है. इसके नाम में सिर्फ दो ही अक्षर हैं. इस लोकप्रिय स्टेशन ने अपना नाम Ib नदी से प्राप्त किया है, जो एक महानदी की एक सहायक नदी है. ऐसा कहा जाता है कि ये भारत का एकमात्र रेलवे स्टेशन है, जिसका नाम सबसे छोटा है.

यह भी पढ़ें: देश का ये अनोखा मंदिर, जहां साल के सिर्फ 12 घंटे के लिए खुलते है कपाट

अगर देश के सबसे लंबे रेलवे प्लेटफार्म की बात करें तो वो है यूपी का गोरखपुर रेलवे स्टेशन. इस प्लेटफार्म की लंबाई 4483 फीट यानी 1366.33 मीटर है. गोरखपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म का नाम विश्व के सबसे लंबे प्लेटफार्म के रूप में दर्ज है.

यह भी पढ़ें: ये हैं दुनिया के सबसे महंगे शहर, शॉपिंग करते-करते हो जाएंगे कंगाल!

आपकी जानकारी के लिए बता दें भारतीय रेलवे का सबसे पहला रेलवे स्टेशन मुंबई में स्थित बोरीबंदर था. देश की पहली यात्री ट्रेन इसी स्टेशन से पुणे तक चलाई गई थी. इसे ‘Great Indian Peninsular Railway’ द्वारा बनाया गया था. इस स्टेशन को साल 1888 में ‘विक्टोरिया टर्मिनस’ के रूप में दोबारा से बनाया गया था.