आचार्य चाणक्य नीतियों को आपने सोशल मीडिया पर खूब देखा और सुना होगा. ऐसा भी बताया जाता है कि चाणक्य नीतियों को ही अपनाकर चंद्रगुप्त मौर्य सम्राट बन गए थे और उनकी नीतियों को अपनाकर आप भी अपने जीवन में सफलता को पा सकते हैं. आचार्य चाणक्य की कई शिक्षाएं और नीतियां आज भी प्रासंगिक है. उनकी शिक्षाएं सफलता पाने पाने और अच्छा इंसान बनने में काफी मदद कर सकता है. मगर हम यहां आपको ये बताएंगे कि कैसे हालातों में भागना ही समझदारी होती है.

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ऐसे 4 हालात में भाग लेने में है समझदारी

आचार्य चाणक्य की नीतियों में बहुत सारी चीजों को जानने को मिलता है. नीति शास्त्र में मुश्किल हालातों में कैसे समाधान निकालना है ये भी बताया जाता है लेकिन कुछ ऐसे भी हालात हैं जिनमें भाग लेना सबसे ज्यादा समझदारी होती है.

1. हिंसा: चाणक्य ने अपनी नीति में बताया कि अगर कहीं हिंसा भड़क जाए, दंगे हो जाएं तो वहां से तुरंत भाग लेना चाहिए. उपद्रव भीड़ बेकाबू हो सकती है और वहां पर ठहरना समझदारी नहीं होती है.ऐसी जगह देर तक टिकने पर जान को खतरा हो सकता है इसलिए जहां हिंसा हो वहां से निकल लेना चाहिए.

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2. बदला: दूसरे राज्य के राजा हमारे देश पर आक्रमण करें तो ऐसी परिस्थिति में वहां से निकल जाना अच्छा होता है. आज के दौर में ऐसे समझें कि अगर हमारा दुश्मिन हम पर हमला करता है तो भाग लेना समझदारी होती है. बिना रणनीति के आप किसी का सामना नहीं करना चाहिए.

3. अर्थव्यव्यवस्था: जिस जगह पर अर्थव्यवस्था गड़बड़ा जाती है जहां लोगों को खाने-पीने, रहने के संसाधनों के लिए तरसना पड़ता है तो वहां से निकल जाना चाहिए. ऐसी जगह ज्यादा दिन तक रुकने से खुद के साथ परिवार को भी नुकसान हो सकता है.

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4. अपराधी: आचार्य चाणक्य के मुताबिक, अगर कोई अपराधी आपके पास खड़ा होता है तो उस जगह से हट जाना बेहतर होता है. इससे आपके मान-सम्मान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. ओपोई इसकी पुष्टि नहीं करता है.