साल 2002 के बिलकिस बानो गैंगरेप मामले (Bilkis Bano gang rape case) में उम्रकैद की सजा पाने वाले ग्यारह लोगों को 15 अगस्त को गोधरा जेल से रिहा कर दिया गया. गुजरात सरकार के गठित एक पैनल ने सजा की छूट के लिए उनके आवेदन को मंजूरी दे दी थी. अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) राज कुमार ने कहा कि छूट के आवेदन पर विचार किया गया क्योंकि दोषियों ने जेल में 14 साल की सजा पूरी कर ली थी. साथ ही उम्र, जेल में उनके व्यवहार को भी ध्यान में रखते हुए उन्हें रिहा कर दिया गया. 

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गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्स्प्रेस में आग लगाने की घटना के बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान बिलकिस बनो के साथ बेरहमी से सामूहिक बलात्कार किया गया था. उस समय वह 21 साल की थी और पांच महीने की गर्भवती भी थी. साथ ही उसके परिवार के सात सदस्यों की दंगाइयों ने हत्या कर दी थी.

गुजरात में एक सामूहिक बलात्कार और सात लोगों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सज़ा पाने वाले 11 दोषियों की सज़ा माफ़ करके उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया.

बिलकिस बानो कौन हैं और 2002 में उनके साथ क्या हुआ था?

गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस में आग लगाए जाने की घटना के अगले दिन 28 फरवरी 2002 को राज्य भर में हिंसा भड़क गई थी. हिंसा के चलते बिलकिस बानो ने दाहोद जिले के राधिकपुर गांव में परिवार के साथ अपना घर छोड़ दिया था. बिलकिस के साथ उसकी बेटी सालेहा (उस समय साढ़े तीन साल की थी) और उसके परिवार के 15 अन्य सदस्य थे. कुछ दिन पहले बकरीद के मौके पर उनके गांव में हुई आगजनी और लूटपाट के डर से पूरा परिवार घर छोड़कर भागा था.

3 मार्च 2002 को पूरा परिवार छप्परवाड़ गांव पहुंचा. चार्जशीट के मुताबिक, उन पर हंसिया, तलवार और लाठियों से लैस करीब 20-30 लोगों ने हमला कर दिया. इन्हीं हमलावरों में 11 आरोपी भी शामिल थे. जिन्हें अब रिहा किया गया है.  

बिलकिस, उसकी मां और तीन अन्य महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया और उन्हें बेरहमी से पीटा गया. राधिकपुर गांव के मुसलमानों के 17 सदस्यों के टोले में से आठ को मार दिया गया और छह लापता हो गए. हमले में केवल बिलकिस, एक आदमी और एक तीन साल का बच्चा बचा.

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बिलकिस हमले के बाद करीब तीन घंटे तक बेहोस रहीं. होश में आने के बाद उसने एक आदिवासी महिला से कपड़े उधार लिए और एक होमगार्ड से मिली जो उसे लिमखेड़ा पुलिस स्टेशन ले गया. उसने हेड कांस्टेबल सोमाभाई गोरी के पास शिकायत दर्ज कराई, जिसने सीबीआई के अनुसार, तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर रिपोर्ट दर्ज की थी.  

गोधरा राहत शिविर पहुंचने के बाद ही बिलकिस को मेडिकल जांच के लिए सरकारी अस्पताल ले जाया गया. उसके मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उठाया. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया. CBI ने जांच में पाया कि आरोपियों को बचाने के लिए बिलकिस की मेडिकल जांच से भी छेड़छाड़ की गई. साथ ही सभी शवों के साथ भी छेड़छाड़ हुई जिससे उन्हें पहचाना न जा सके. 

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केस में क्या हुआ?

बिलकिस बानो को जान से मारने की धमकी मिलने के बाद मुकदमे को गुजरात से बाहर महाराष्ट्र ले जाया गया. मुंबई की अदालत में छह पुलिस अधिकारियों और एक सरकारी डॉक्टर समेत 19 लोगों के खिलाफ आरोप दर्ज किए गए.

जनवरी 2008 में एक स्पेशल कोर्ट ने 11 आरोपियों को एक गर्भवती महिला से बलात्कार की साजिश रचने, हत्या, गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने और भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के तहत आरोपों का दोषी ठहराया. हेड कांस्टेबल को आरोपी को बचाने के लिए गलत रिपोर्ट लिखने का दोषी ठहराया गया था. कोर्ट ने सबूतों के अभाव में सात लोगों को बरी कर दिया. सुनवाई के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई. 

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अदालत ने माना कि जसवंतभाई नाई, गोविंदभाई नाई और नरेश कुमार मोर्धिया (मृतक) ने बिलकिस के साथ बलात्कार किया था, जबकि शैलेश भट्ट ने उसकी बेटी सालेहा की हत्या की थी. दोषी ठहराए गए अन्य लोगों में राधेश्याम शाह, बिपिन चंद्र जोशी, केसरभाई वोहानिया, प्रदीप वोहानिया, बाकाभाई वोहानिया, राजूभाई सोनी, नितेश भट्ट, रमेश चंदना और हेड कांस्टेबल सोमभाई गोरी शामिल हैं.

गोधरा ट्रेन जलाने की घटना 27 फरवरी 2002 की सुबह हुई थी, जिसमें गुजरात में गोधरा रेलवे स्टेशन के पास साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में आग लगाए जाने से अयोध्या से लौट रहे 59 हिंदू तीर्थयात्री और कारसेवक मारे गए थे.