राजस्थान के उदयपुर में टेलर की निर्मम हत्या करने वाले आरोपियों मोहम्मद रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद को लेकर बड़े खुलासे का दावा किया जा रहा है.  दोनों ही हत्यारों के संबंध ‘दावत-ए-इस्लामी’ संगठन से बताए जा रहे हैं. ऐसे में जानते है कि दावत-ए-इस्लामी का गठन कब और क्यों हुआ था.

दावत-ए-इस्लामी एक सुन्नी मुस्लिम संगठन है. इस संगठन का काम पैगंबर मोहम्मद साहब के संदेशों का प्रचार और प्रसार करना है. इसी बुनियाद पर इसका गठन भी हुआ था. उदयपुर की घटना पैगंबर की बेअदबी से जुड़ी हुई है क्योंकि दोनों हत्यारों ने वीडियो जारी करके कहा था कि यह इस्लाम और पैगंबर के अपमान का बदला है.

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दावत-ए-इस्लामी का 194 देशों में नेटवर्क

‘दावत-ए-इस्लामी’ का गठन और संचालन पाकिस्तान से होता है और दुनिया के 194 देशों में इसका नेटवर्क फैला है. साल 1981 में ‘दावत-ए-इस्लामी’ का गठन मौलाना मौलाना इलियास अत्तारी ने पाकिस्तान के कराची में किया था. इलियास अत्तारी के चलते दावत-ए-इस्लामी से जुड़े लोग अपने नाम के साथ अत्तारी लगाते हैं.

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भारत में कैसे शुरू हुआ दावत-ए-इस्लामी

1989 में पाकिस्तान से उलेमा का एक प्रतिनिधिमंडल भारत आया था. इसी के बाद ‘दावत-ए-इस्लामी’ संगठन को लेकर भारत में चर्चा शुरू हुई और इसकी शुरुआत हुई. भारत में दिल्ली और मुंबई में संगठन का हेडक्वार्टर है. सैयद आरिफ अली अत्तारी ‘दावत-ए-इस्लामी’ के भारत में विस्तार का काम कर रहे हैं. 

दावत-ए-इस्लामी के लिए नब्बे के दशक में हाफिज अनीस अत्तारी ने अपने 17 साथियों के साथ मशविरा किया. इस दौरान तय किया गया कि जब तबलीगी जमात के लोग लेकर चल सकते हैं, तो हम क्यों नहीं? बस यहीं से सिलसिला शुरू हो गया. उस समय लोगों को साथ जोड़ने के लिए 17 लोगों ने नया तरीका निकाला था. 

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‘दावत-ए-इस्लामी’ ने अपनी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने के लिए चैनल खोल रखा है जिसका नाम मदनी है. इस चैनल पर उर्दू के साथ अंग्रेजी और बांग्ला में में भी कार्यक्रम प्रसारित होते हैं. चैनल का संचालन पाकिस्तान से किया जाता है. दावत-ए-इस्लामी का नेटवर्क करीब 194 देशों में फैला है, दावत-ए-इस्लामी के सदस्य हरा अमामा (पगड़ी) बांधते हैं तो कुछ लोग सफेद पगड़ी भी बांधने लगे हैं.  

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