दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने शुक्रवार को ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) को एक कथित आपत्तिजनक ट्वीट मामले से संबंधित एक मामले में जमानत दे दी, जिसमें उन्हें पिछले महीने दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था. अन्य मामले दर्ज होने के चलते वह अभी रिहा नहीं होंगे. 

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एडिशनल सेशन के न्यायाधीश देवेंद्र कुमार जांगला ने शुक्रवार को मोहम्मद ज़ुबैर को 50 हजार के निजी मुचलके पर जमानत देने का आदेश सुनाया है. देवेंद्र कुमार जांगला ने कहा कि वह अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ सकते. गुरुवार को कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें खत्म होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.

दिल्ली पुलिस के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अतुल श्रीवास्तव ने मोहम्मद जुबैर की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इस स्तर पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि ये FCRA का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि बिना किसी पक्षपात के मामले में जांच तेज गति से चल रही है. 

दिल्ली पुलिस ने कहा, “FCRA का उल्लंघन करने वाले मोहम्मद जुबैर जिस संगठन में निदेशक हैं उसे 56 लाख रुपये मिले हैं. हमने रेजर पे को नोटिस भेजा है. इस मामले में एक निश्चित जालसाजी भी है. जिसकी जांच की जानी है. बैंक का नोटिस पहले ही जारी किया जा चुका है.”

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पुलिस का आरोप है कि यह सुनियोजित और चतुराई से किया गया है. दिल्ली पुलिस के वकील ने कहा, “यह उतना आसान नहीं है जितना जुबैर के वकील ने पेश किया है.” अतुल श्रीवास्तव ने सेशन कोर्ट के सामने कहा कि जुबैर ने ट्वीट के माध्यम से एक समुदाय की भावनाओं को आहत किया है. उन्होंने कहा, “हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं और उन्होंने अपने ट्वीट के जरिए हनुमान जी की तुलना हनीमून से की है.”

जुबैर की ओर से पेश हुई एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने दिल्ली पुलिस के विदेशी फंडिंग के आरोपों से इनकार किया. उन्होंने कहा, “हमें कोई विदेशी योगदान नहीं मिला है, न तो मेरे व्यक्तिगत और न ही संगठन के खाते में. हमने लोगों को अपने संगठन में दान करने के लिए आमंत्रित किया है लेकिन यह साहसपूर्वक लिखा है कि हम विदेशी धन स्वीकार नहीं करते हैं. जैसा कि हम ‘FCRA के तहत रजिस्टर्ड नहीं हैं. इसलिए हम विदेशी फंड नहीं लेते हैं. दान और धन की हमारी प्राप्ति बहुत पारदर्शी है.”

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मोहम्मद जुबैर के खिलाफ शिकायत 2018 के ट्वीट से संबंधित है, जिसमें उन्होंने एक तस्वीर शेयर की थी. हाल ही में मोहम्मद ज़ुबैर ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों में दर्ज FIR को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. साथ ही इन मामलों में अंतरिम जमानत के लिए भी अपील की है. सीतापुर और हाथरस की अदालत ने उन्हें अलग-अलग शिकायतों पर 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा था.