श्रावण के पहले सोमवार पर भगवान महाकालेश्‍वर ने चंद्रमौलेश्वर के स्‍वरूप में नगर भ्रमण किया. सवारी के निकलने के पूर्व श्री महाकालेश्‍वर मंदिर परिसर के सभामंडप में कलेक्टर आशीष सिंह ने सपत्निक भगवान श्री महाकालेश्‍वर के चंद्रमौलेश्वर स्वरूप की पूजा-अर्चना की. इसके बाद कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने पालकी को कंधा देकर आगे बढ़ाया. इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब महाकाल ने नगर भ्रमण के समय भक्तों को सोशल मीडिया के माध्यम से दर्शन दिए.  3 लाख  से भी ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा के ऑनलाइन दर्शन किये.

कुछ ऐसा था महाकाल की सवारी का दृश्य

भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले. पालकी जैसे ही श्री महाकालेश्‍वर मंदिर के मुख्‍य द्वार पर पहुंची, सशस्‍त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में सवार श्री चंद्रमौलेश्वर को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दी गई. भगवान महाकालेश्वर की सवारी कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर परिवर्तित मार्ग से निकाली गई. महाकालेश्वर मन्दिर से सवारी हरसिद्धि मंदिर के सामने से होकर नृसिंह घाट पर झालरिया मठ होते हुए रामघाट पहुंची.

रामघाट पर हुआ भगवान महाकाल का जलाभिषेक

भगवान महाकालेश्वर की प्रथम सवारी परिवर्तित मार्ग से रामघाट पर पहुंची. यहां पर मां शिप्रा के जल से भगवान का जलाभिषेक कर आरती की गई. पूजन एवं आरती में प्रदेश के केबिनेट मंत्री डॉ.मोहन यादव एवं सांसद अनिल फिरोजिया शामिल हुए. रामघाट पर सवारी के साथ संभागायुक्त आनन्द कुमार शर्मा, जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसकेपी कुलकर्णी, आईजी राकेश गुप्ता, डीआईजी मनीष कपूरिया, कलेक्टर आशीष सिंह, पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह सहित विभिन्न वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे. रामघाट के साथ-साथ दत्त अखाड़ा क्षेत्र से भी परम्परागत आरती एवं पूजन किया गया. सवारी इसके बाद पुन: रामघाट से रवाना होकर रामानुजकोट, हरसिद्धि मन्दिर होते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची.

श्री महाकालेश्‍वर भगवान की दूसरी सवारी 13 जुलाई सोमवार को निकलेगी, जिसमें पालकी में श्री मनमहेश विराजित होंगे एवं हाथी पर श्री चंद्रमौलेश्वर विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलेगी.