Employment Issue: कर्नाटक चुनाव हो या देश के अन्य राज्यों में चुनाव कांग्रेस नेता राहुल गांधी लंबे समय से रोजगार का मुद्दा (Employment Issue) उठा रहे हैं. हालांकि, इस मुद्दे पर सरकार कम ही बात करती है. लेकिन राहुल गांधी इस मुद्दे को उठाते थकते नहीं. राहुल गांधी हमेशा सरकार को उनके कथित वादे ‘हर साल 2 करोड़ नौकरियां’ को याद दिलाते रहते हैं. राहुल गांधी का दावा है कि देश में बेरोजगारी 40 साल में सबसे ज्यादा है. वहीं, देश के गृह मंत्री अमित शाह रोजगार के मुद्दे पर राहुल गांधी से ठोस सबूत मांग रहे हैं.

Employment Issue के मामले में युवाओं में निराशा

हालांकि, रोजगार एक बड़ा मुद्दा है. भेल ही नेताओं को ये चुनाव के समय याद आता है और सरकार भी चुनाव के समय रोजगार के बड़े-बड़े वादे करते हैं. लेकिन ये मुद्दा देश के लिए सबसे गंभीर है. रोजगार को लेकर युवाओं में अभी भी निराशा दिखती है. अगर सरकार नौकरी दे भी रही है तो उसकी संख्या शायद इतनी नहीं है वरना युवाओं में सरकारी नौकरी को लेकर इतनी निराशा नहीं होती.

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ऐसे में ये सवाल लाजमी है कि सरकार जो नौकरियों का वादा कर सत्ता में आई है. क्या वह पर्याप्त नौकरी युवाओं के लिए उपलब्ध करा पा रही है. रोजगार के सवाल पर बीजेपी के मंत्री ने खुद संसद में इसका जवाब दिया है. और शायद ये निराशाजनक है जो बेरोजगारी के मुद्दे को सच साबित करती है.

संसद में सरकार की रिपोर्ट

रोजगार के मुद्दे पर कार्मिक मंत्री जितेंद्र सिंह ने संसद में बताया था कि, वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडिचर की सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि, केंद्र सरकार ने सभी तरह के मंत्रालयों और विभागो में मार्च 2021 तक करीब 40 लाख 35 हजार पद ऐसे थे जिनपर नियुक्तियां की जानी थी. हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, इन नियुक्तियों में केवल 30 लाख 55 हजार लोगों को नौकरियां दी गई. यानी करीब 9 लाख 79 हजार पद अभी भी खाली हैं और इसे रिक्त छोड़ दी गई हैं.

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हरा सला 1 लाख से ज्यादा लोगों को मिलती है नौकरी

सरकार के अनुसार साल 2014 से लेकर जुलाई 2022 तक अलग-अलग सरकारी विभागों में करीब 7 लाख 22 हजार 311 लोगों को सरकारी नौकरी मिली है. यानी 7 सालों में करीब हर साल 1,03,187 लोगों को ही नौकरी मिली है. साल 2018-19 में महज 38,100 लोगों को ही सरकारी नौकरी मिली थी. हैरानी की बात ये है कि, 2018-19 में ही सबसे ज्यादा 5,करोड़ 9 लाख 36 हजार 479 लोगों ने सरकारी नौकरी के लिए आवेदन किया था. इसके बावजूद भी इतनी कम भर्ती हुई है.

बता दें, सेंटर फ़ॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के अनुसार भारत में साल 2021 के में बेरोजगारी दर 7.9 फीसदी थी. वहीं साल 2020 में ये दर 7.11 प्रतिशत थी.