आम आदमी पार्टी ने आज यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. बेशक, आम आदमी पार्टी वैसे तो लंबे समय से दिल्ली के बाहर भी अपनी राजनीति की तलाश कर रही है. उत्तराखंड में भी चुनाव लड़ने की घोषणा की है और अब यूपी को लेकर बयान सामने आया है.

वैसे, तो दिल्ली में तीन बार सरकार बना चुकी आम आदमी पार्टी को सिर्फ एक मौके की तलाश है कि एक मौका मिले तो वह खुद को साबित करे और उस स्टेट में जम जाएं, जैसा कि दिल्ली में हुआ है. कहीं न कहीं केजरीवाल को दिल्ली से आगे सोचने की जरूरत इसलिए भी पड़ी, क्योंकि उन्हें दिल्ली से इतर देशभर में एक मजबूत आधार चाहिए. तीन साल हो गए हैं, दिल्ली में सरकार बनाए, तो कहीं न कहीं दिल्ली के अगले चुनाव में एंटी इनकम्बेंसी का खतरा भी केजरीवाल सरकार को महसूस हो ही रहा है, ऐसे में यूपी एक मजबूत आधार हो सकता है.  

 

पंजाब में मिली थीं 20 सीटें

मगर ये भी नहीं भूल सकते कि दिल्ली से बाहर केवल पंजाब में ही वह थोड़ा बहुत आधार बना पाए थे, लेकिन वह भी बहुत मजबूत नहीं. दिल्ली में 70 में से 67 सीटें जीतने वाली आम आदमी पार्टी ने 2017 के चुनावों में पूर्ण बहुमत लाने का वादा किया था, लेकिन पूरा जोर लगाकर भी केवल 20 सीटों पर ही वह जीत दर्ज करने में कामयाब हुई.  हालांकि राज्य में दूसरी बड़ी पार्टी बन गई , लेकिन जानकारों का मानना है कि क्या दिल्ली छोड़कर केजरीवाल पंजाब जाएंगे? पंजाब की जनता कैसे विश्वास करती कि वह यहां आकर काम करेंगे, जनता को थोड़ी शंका जरूर थी, लेकिन फिर भी केजरीवाल को 20 सीटों पर जीत मिली थी, जो कि किसी नई पार्टी के लिए ठीक-ठाक सीटें थीं.

 

हरियाणा, गुजरात और गोवा में नहीं मिली एक भी सीट

इसी तरह आम आदमी पार्टी ने गोवा में भी चुनाव लड़ा.  अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के कई स्टार चेहरों ने यहां मेहनत की थी, लेकिन आप यहां पर 40 में से एक भी सीट नहीं निकाल पाई थी. यही हाल हरियाणा में हुआ था, जहां 90 में से 46 सीटों पर आम आदमी पार्टी ने अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन वह एक भी सीट पर नहीं जीती. कई सीटों पर तो प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो गई थी. यही हाल गुजरात में भी हुआ. विधानसभा चुनावों में यहां भी आम आदमी पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली.

 

नरेंद्र मोदी के सामने भी लड़े थे केजरीवाल

2014 के चुनावों में अरविंद केजरीवाल राजनीति में माहिर नरेंद्र मोदी के सामने भी मैदान में उतरे थे. वाराणसी की सीट पर नरेंद्र मोदी ने अरविंद केजरीवाल को 3 लाख 71 हजार वोटों से हराया था, वहीं अरविंद केजरीवाल को 2 लाख से अधिक वोट मिले थे. जीत का ये अंतर काफी बड़ा था.  2014 के लोकसभा चुनाव में आप को केवल पंजाब में चार सीटें मिली थीं, उनके कई दिग्गज नेता हार गए थे, जिसके बाद आम आदमी पार्टी ने कहा था कि वह फिलहाल दिल्ली पर फोकस करेंगे. अब यूपी को लेकर अरविंद केजरीवाल की घोषणा ये बता रही है कि फोकस सिर्फ दिल्ली नहीं बल्कि देश है. आम आदमी पार्टी ने यूपी की बीजेपी, सपा, बसपा, कांग्रेस के बीच चुनाव लड़ने की घोषणा करके मुकाबले को रोमांचक तो बना ही दिया है. देखते हैं आगे क्या होगा?

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