Heart Arrhythmia Disease: आज के समय में दिल से संबंधित समस्याएं (Heart Problems) बढ़ती ही जा रही हैं. अगर समय पर इन समस्याओं पर ध्यान न दिया जाए, तो व्यक्ति की जान तक जा सकती है. ऐसे में लोगों को अपने दिल के स्वास्थ्य (Heart Health) पर ध्यान देना चाहिए, ताकि यदि अगर कोई दिल से संबंधित समस्या पनप रही हो, तो समय रहते अपने खानपान, दैनिक गतिविधियों और चिकत्सीय सहायता की मदद से उस समस्या का निदान किया जा सके. ऐसे में आपको हार्ट एरिदमिया के बारे में जरूर जानना चाहिए. क्योंकि यह समस्या हार्ट अटैक का एक लक्षण (Heart Attack Symptoms) हो सकती है. इस आर्टिकल में हम हार्ट एरिदमिया का मतलब, उसके लक्षण और इलाज (Symptoms and Treatment of Arrhythmia) के बारे में बताने वाले हैं.

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Heart Arrhythmia: हार्ट एरिदमिया क्या है?

रिपोर्ट्स की मानें, तो हार्ट एरिदमिया एक हार्ट डिसऑर्डर है, दिल की इस रेट और रिदम के पीछे दिल की विद्युत प्रणाली कार्य करती है, ऐसे में दिल की विद्युत प्रणाली में कोई भी समस्या होने की स्थिति में दिल की धड़कन प्रभावित होती है और ऐसे केस में अक्सर दिल की सामान्य धड़कन भी हिल जाती है. जिसके कारण हृदय बहुत तेजी से धड़कना शुरू कर सकता है या बहुत धीमा भी हो सकता है. इसे ही हार्ट एरिदमिया ( Heart Arrhythmia ) कहते हैं.आपको बता दें कि वैसे तो हार्ट एरिदमिया हानिरहित होती है, लेकिन जब यह समस्या दिमाग, फेफड़े, दिल या अन्य जरूरी अंगों तक जाने वाले रक्त प्रवाह में बाधा विकसित होने का कारण बन जाती है, तो ऐसे केस में यह जानलेवा साबित हो सकती है.

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एरिदमिया के लक्षण ( Arrhythmia Symptoms) 

1. दिल की धड़कन का गड़बड़ होना.

2. गर्दन या सीने में फड़फड़ाहट.

3. तेज धड़कन-धीमी धड़कन.

4. अत्यधिक पसीना आना.

5. श्वांस लेने में परेशानी.

6. सीने में दर्द बना रहना.

7. हफनी आना आदि

इस तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत आपको अच्छे डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए.

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एरिदमिया का इलाज (Arrhythmia Treatment)

उपरोक्त लक्षण दिखने के बाद डॉक्टर एरिदमिया की पुष्टि करने के लिए ईसीजी, हार्ट मॉनिटर, स्ट्रेस टेस्ट, इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिकल टेस्टिंग, ब्लड टेस्ट आदि का इस्तेमाल करता है. इसके बाद वह स्थिति के अनुसार एरिदमिया का इलाज शुरू करता है. जैसे कि –

1- लाइफस्टाइल में बदलाव

2- हाई ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करवाना

3- हार्ट रेट को बैलेंस करने के लिए कुछ एक्सरसाइज और मशीनों की मदद लेना.

4- दिल की बीमारी से संबंधित दवाओं का सेवन करवाना

5- गंभीर स्थिति में सर्जरी कराना

(नोटः ये जानकारी एक सामान्य सुझाव है. इसे किसी तरह के मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें. आप इसके लिए अपने डॉक्टरों से सलाह जरूर लें.)