सीने में कफ जमा होने से कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं. कफ यानी बलगम जो एक चिकना और पतला पदार्थ है जिसे मानव शरीर के रक्षा और मुख्य गुहाओं के आंतरिक अंग को चिकनाई प्रदान करने के लिए उत्पन्न किया जाता है. जब यह कफ गाढ़ा और ज्यादा चिकना होता है तो शरीर में समस्याएं ज्यादा पैदा कर देता है. धूम्रपान, संक्रमण, एलर्जी जैसे कई कारणों से कफ की समस्या बढ़ने लगती है.

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कफ की परेशानियों से राहत पाने के लिए कई घरेलू उपचार हैं जिन्हें हम ठीक कर सकते हैं. लेकिन अगर इसकी समस्या ज्यादा होती है तो आपको एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए. फिलहाल हम आपको आयुर्वेदिक तौर पर कुछ घरेलू उपाय बताने जा रहे हैं.

आयुर्वेद के जरिए कफ का घरेलू इलाज

हल्दी का प्रयोग: बलगम की परेशानी को दूर करने के लिए हल्दी को पानी में डालकर गर्म कर लें और इसे दिन में दो बार पिएं. हल्दी पानी का प्रयोग फायदा करेगा और यह बैक्टीरियल संक्रमण भी दूर करने में मददगार होता है.

मुलेठी: आयुर्वेद में मुलेठी को शक्तिवर्धक और ऊर्जादायक माना गया है. गले की खराश हो, सूजन हो या फिर गले से जुड़ी छोटी-मोटी कोई भी समस्या हो मुलेठी का सेवन दूर कर देता है. मुलेठी के पाउडर में थोड़ा घी डालकर दूध के साथ उबाल लें. जब ये काढ़ा जैसा तैयार हो जाए तो दिन में दो बार पिएं.

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पिप्पली: इसमें दर्द निवारक गुण पाया जाता है जो गले की खराश को दर्द में राहत देता है. कफ की परेशानी होने पर इसका सेवन पाउडर के रूप में करे. हालांकि इसका सेवन करने से पहले अगर आप डॉक्टर से राय ले लें तो ज्यादा अच्छा रहता है.

अदरक: आयुर्वेद में अदरक का सेवन कई संक्रमण से जुड़ी समस्याओं का निवारक माना गया है. आप अदरक का पानी, अदरक की चाय या फिर अदरक का काढ़ा पी सकते हैं. मगर ध्यान रहे इसका सेवन आप ज्यादा ना करें वरना दूरसी परेशानी शुरू होने का खतरा भी रहता है.

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वच: आयुर्वेद में वच एक तीखी जड़ी बूटी होती है. इसके इस्तेमाल से आपके शरीर को भरपूर ऊर्जा प्राप्त होती है. इसके साथ ही शरीर के कफ दोष को दूर करने में भी ये प्रभावी हो सकता है. वच के पाउडर को दूध में मिलाकर पीना फायदेमंद होता है. इसके अलावा आप इसका काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं लेकिन इसका सेवन दिन में एक बार ही करें.

डिस्क्लेमर: ये जानकारी एक सामान्य सुझाव है. इसे किसी तरह के मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें. आप इसके लिए अपने डॉक्टरों से सलाह लें.

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