Sandese Aate Hai Lyrics in Hindi: 15 अगस्त 2022 यानी सोमवार के दिन देश का 75वां स्वतंत्रता दिवस (Independence day 2022) मनाया जाएगा. इस बात को तो सभी लोग जानते हैं कि लाखों बलिदानों और कई दशकों की लंबी लड़ाई के बाद हमको आजाद हवा में सांस लेने का अवसर मिला है. ऐसे में स्वतंत्रता दिवस पर शहीदों को याद करके उन्हें श्रदांजलि दी जाती है. 15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री लाल किले पर सबसे पहले झंडारोहण करते है. लोग बहुत धूम-धाम के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं. कुछ लोग इस दिन देशभक्ति गीत को सुनना अधिक पसंद करते हैं.

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इस खास मौके पर लोग ‘संदेशे आते हैं’ सॉन्ग को बहुत सुनते हैं. यह सॉन्ग बॉर्डर मूवी का है. इस सॉन्ग को सोनू निगम और रूप कुमार राठौड़ द्वारा गाया गया है और गाने को जावेद अख्तर ने लिखा है. यहां हम आपको बताएंगे कि ‘संदेशे आते हैं’ सॉन्ग के हिंदी लिरिक्स.

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Sandese Aate Hain Lyrics in Hindi-

संदेशे आते हैं,

हमें तड़पाते हैं,

जो चिट्ठी आती है,

वो पूछे जाती है,

के घर कब आओगे,

के घर कब आओगे,

लिखो कब आओगे,

के तुम बिन ये घर सूना सूना है.

संदेशे आते हैं,

हमें तड़पाते हैं,

जो चिट्ठी आती है,

वो पूछे जाती है,

के घर कब आओगे,

के घर कब आओगे,

लिखो कब आओगे,

के तुम बिन ये घर सूना सूना है.

किसी दिलवाली ने,

किसी मतवाली ने,

हमें खत लिखा है,

ये हमसे पूछा है,

किसी की साँसों ने,

किसी की धड़कन ने,

किसी की चूड़ी ने,

किसी के कंगन ने,

किसी के कजरे ने,

किसी के गजरे ने,

महकती सुबहों ने,

मचलती शामों ने,

अकेली रातों में,

अधूरी बातों ने,

तरसती बाहों ने,

और पूछा है तरसी निगाहों ने,

के घर कब आओगे,

के घर कब आओगे,

लिखो कब आओगे,

के तुम बिन ये दिल सूना सूना है.

संदेशे आते हैं,

हमें तड़पाते हैं,

जो चिट्ठी आती है,

वो पूछे जाती है,

के घर कब आओगे,

के घर कब आओगे,

लिखो कब आओगे,

के तुम बिन ये घर सूना सूना है.

मोहब्बत वालों ने,

हमारे यारों ने,

हमें ये लिखा है,

कि हमसे पूछा है,

हमारे गाँवों ने,

आम की छांवों ने,

पुराने पीपल ने,

बरसते बादल ने,

खेत खलियानों ने,

हरे मैदानों ने,

बसंती बेलों ने,

झूमती बेलों ने,

लचकते झूलों ने,

दहकते फूलों ने,

चटकती कलियों ने,

और पूछा है गाँव की गलियों ने,

के घर कब आओगे,

के घर कब आओगे,

लिखो कब आओगे,

के तुम बिन गाँव सूना सूना है.

संदेसे आते है,

हमें तड़पाते हैं,

जो चिट्ठी आती है,

वो पूछे जाती है,

के घर कब आओगे,

के घर कब आओगे,

लिखो कब आओगे,

के तुम बिन ये घर सूना सूना है.

कभी एक ममता की,

प्यार की गंगा की,

जो चिट्ठी आती है,

साथ वो लाती है,

मेरे दिन बचपन के,

खेल वो आंगन के,

वो साया आंचल का,

वो टीका काजल का,

वो लोरी रातों में,

वो नरमी हाथों में,

वो चाहत आँखों में,

वो चिंता बातों में,

बिगड़ना ऊपर से,

मोहब्बत अंदर से,

करे वो देवी माँ,

यही हर खत में पूछे मेरी माँ,

के घर कब आओगे,

के घर कब आओगे,

लिखो कब आओगे,

के तुम बिन आँगन सूना सूना है