नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव के लिए प्रस्ताव दिया गया था जिसे अब मंजूरी मिल गई है. इसमें अब आपको 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री या मैथ की पढ़ाई करने की जरूरत नहीं बल्कि कुछ चुनिंदा पाठ्यक्रमों के जरिए भी आप इंजीनियरिंग में प्रवेश ले सकते हैं. इन पाठ्यक्रमों में बायोटेक्नोलॉजी, टेक्सटाइल और एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग जैसे कोर्श शामिल किए गए हैं.

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के चेयरमैन प्रोफेसर अनिल डी. सहस्त्रबुद्धे ने इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में बदलावों के विवादों को साफ कर दिया है. उन्होंने कहा है कि फिजिक्स, केमिस्ट्री और गणित जैसे सबजेक्ट्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए जरूरी है लेकिन इंजीनियरिंग के कुछ खास कोर्स के लिए जरूरी नहीं है. इसमें बायोटेक्नोलॉजी, टेक्सटाइल और एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग जैसे कोर्स शामिल है. एआइसीटीई के शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए जारी हुए हैंडबुक को लेकर प्रोफेसर सहस्त्रबुद्धे न शुक्रवार को वर्चुअल चर्चा की. उन्होंने बताया कि फिलहाल इस बदलाव को अनिवार्य नहीं किया गया है, इसे विकल्प के रूप में रखा गया है जिसे कोई भी राज्य या इंजीनियरिंग संस्थान अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा. वे पहले की तरह फिजिक्स, केमिस्ट्री और गणित के अपने पैटर्न पर इंजीनियरिंग में प्रवेश के प्रोसेस को जारी रखें.

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जब प्रोफेसर ने बताया कि नीति में मातृभाषा में पढ़ाई को प्रमुखता दी गई है. एक सर्वे के मुताबिक, 42 फीसदी बच्चे अपनी मातृभाषा में ही इंजीनियरिंग करना चाहते हैं, ऐसी स्थिति तब होगी जब इन छात्रों ने 12वीं तक की पढ़ाई इंग्लिश मीडियम से की हो. इसके बावजूद अब वह तमिल, बांग्ला या मराठी भाषा में भी इंजीनियरिंग कर सकते हैं. प्रोफेसर सहस्त्रबुद्धे ने बताया कि अगर कोई अपनी मातृभाषा में इंजीनियरिंग करना चाहता है तो उनके पास विकल्प मौजूद हैं. ऐसी सोच कि इंजीनियरिंग सिर्फ इंग्लिश मीडियम वाले ही कर सकते हैं ये गलत है. 

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