साल 2022 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर दिन मंगलवार को लग रहा है. भारत में आंशिक सूर्य ग्रहण रहेगा. दिल्ली, बेंगलुरु, उज्जैन, कोलकाता, वाराणसी, मथुरा समेत भारत के अन्य शहरों में भी सूर्य ग्रहण दिखाई देगा. और इसका सूतक काल भी प्रभावी रहेगा जो सुबह 3 बजकर 17 मिनट से शुरू हो जाएगा. सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) के खत्म होने पर सूतक का असर भी समाप्त हो जाता है. आपके दिमाग में प्रश्न उठ रहा होगा कि आखिर सूतक काल (Sutak Period) क्या होता है? और इस दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं. तो आइए अपने इस  प्रश्न का उत्तर इस लेख में पढ़ें.

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सूर्य ग्रहण 2022 समय और सूतक काल समय

25 अक्टूबर 2022, दिन मंगलावर को साल का अंतिम सूर्य ग्रहण पड़ रहा है. जो 25 अक्टूबर शाम 4:28 मिनट से  शाम 5:30 तक रहेगा. बता दें कि सूर्य ग्रहण के समापन समय में थोड़ा बहुत अंतर हो सकता है.

सूर्य ग्रहण का सूतक काल सुबह 3 बजकर 17 मिनट से शुरू होगा और शाम 5: बजकर 42 मिनट तक रहेगा.

क्यों लगता है सूर्य ग्रहण 

सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना होती है. बता दें कि जब पृथ्वी सूर्य के चारों तरफ चक्कर लगाती है. और सूर्य एक जगह ही स्थित रहता है. लेकिन चंद्रमा पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाता है.और जब चंद्रमा चक्कर लगाते-लगाते सूर्य और पृथ्वी के बीच में एक सीधी लाइन में आ जाता है तब उस कंडीशन में सूर्य ग्रहण लगता है.

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जानें क्या होता है सूतक काल?

धार्मिक मान्यता है कि, सूर्य और चंद्र ग्रहण का सूतक काल क्रमशः 12 घंटे और 9 घंटे पहले शुरू होता है. सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण समय से 12 घंटे पहले  प्रारंभ हो जाता है, जबकि चंद्र ग्रहण में सूतक काल 9 घंटे पूर्व पहले शुरू हो जाता है. बता दें कि सूतक काल को एक प्रकार से अशुभ समय माना जाता है. कहा जाता है कि इसमें कोई भी मांगलिक शुभ कार्य नहीं करना चाहिए. ग्रहण के खत्म होने के कुछ समय बाद सूतक काल भी का समाप्त हो जाता है. ध्यान रहे कि जिस स्थान पर सूर्य ग्रहण दिखाई देता है, वहां पर सूतक काल मान्य होता है.

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सूतक काल में रखें इन बातों का ध्यान

– सूतक काल के दौरान सोना वर्जित होता है.

– सूतक काल में खाना बनाना और खाना वर्जित होता है.

-सूतक काल में गर्भवती महिलाओं को खास ध्यान रखना चाहिए. उन्हें इस दौरान नुकीले धारदार वस्तुओं जैसे चाकू, कैंची, सुई आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए.

 – सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं, लेकिन कहा जाता है कि इस दौरान अपने इष्टों का नाम लेना चाहिए और उनका जाप करना चाहिए.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. ओपोई इसकी पुष्टि नहीं करता है.)