Sharad Purnima Katha: अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि के दिन शरद पूर्णिमा मनाई जाती है. इसी दिन से शरद ऋतु की शुरुआत हो जाती है और कार्तिक माह का आगमन होता है. शरद पूर्णिमा की रात जो चांद निकलता है उसमें खूब शीतलता रहती है और उसकी किरणें सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है. शरद पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. वैसे भी पूर्णिमा का चांद पूरा रहता है और शरद पूर्णिमा हर पूर्णिमा तिथि में विशेष होता है. शरद पूर्णिमा की रात पूजा करनी चाहिए, खीर का भोग लगाना चाहिए, मंत्र का जाप करना चाहिए और इसकी कथा भी पढ़नी चाहिए. शरद पूर्णिमा के दिन कथा कराना अच्छा माना गया है.

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क्या है शरद पूर्णिमा की कथा? (Sharad Purnima Katha)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक नगर में एक साहूकार रहा करता था. जिनकी दो बेटियां थीं, जो हर महीने में आने वाली पूर्णिमा का व्रत करती थीं. इन दोनों बेटियों में बड़ी पूर्णिमा का व्रत विधि-विधान से करती थी लेकिन छोटी बेटी व्रत के नियमों का पालन नहीं करती थी. ये व्रत के नाम पर खाना पूर्ति किया करती थी जो सही नहीं होता है. साहूकार की दोनों बेटियां जैसे बड़ी हुईं तो उनका विवाद करा दिया गया. बड़ी बेटी के घर स्वस्थ संतान ने जन्म लिया तो छोटी बेटी की संतान जन्म लेते मर गई. इस तरह छोटी बेटी को लगातार दो बार ऐसा ही हुआ. इसके बाद उसने एक ब्राह्मण को बुलाया और सारी बात बताई तो उन्होंने इसका उपाय बताया. ब्राह्मण ने कहा, बेटी तुमने पूर्णिमा का व्रत तो किया लेकिन वो अधूरा रहा. इसलिए तुम्हे उसका पूरा फल नहीं मिल पाया. अधूरे व्रत के कारण तुम्हे दोष लगा है लेकिन पूर्णिमा के व्रत को विधि-विधान से करो.

Sharad Purnima Kheer
शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने की मान्यता.

इसके बाद छोटी बेटी ने ऐसा ही करने का निर्णय लिया. लेकिन जब व्रत के बाद संतान हुई तो वो भी मृत रहा. उसने एक पीढ़े पर बच्चे का शव रखा और उसे चादर से ढक दिया. जब बड़ी बहन उससे मिलने आई तो वो पीढ़े पर जैसे बैठने चली तो उसका लहंगा बच्चे से स्पर्श हुआ और बच्चा जीवित हो गया. इसके बाद दीदी गुस्सा हुई और कहने लगी ऐसा करके तुम बच्चे को मारने का कलंक लगाना चाहती हो. इसके बाद छोटी बहन ने कहा, ‘ऐसा नहीं दीदी, मेरा बच्चा जीवित पैदा तो हुआ लेकिन फिर मृत हो गया. तुमने सच्चे मन से शरद पूर्णिमा की पूजा की थी इसलिए तुम्हारा स्पर्श ही पवित्र है और उससे ही मेरा बच्चा जीवित हो गया. अब मैं भी शरद पूर्णिमा की पूजा विधि-विधान से करूंगी.’ तब से शरद पूर्णिमा पर व्रत रखने और विधिवत पूजा करने का विधान बन गया. इस पूजा में खीर का भोग जरूर लगाया जाता है जिससे भगवान आपसे प्रसन्न होकर आपकी मनोकामनाएं पूरी करें.

शरद पूर्णिमा का मंत्र (Shahrad Punima Mantra)

शरद पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए विधिवत पूजा के साथ इन मंत्रों का जाप करें.
ॐ श्री ह्रीं श्री कमले कमलाये प्रसिद प्रसिद श्री ह्रीं श्री महालक्ष्मयै नमः

शरद पूर्णिमा के दिन भगवान कुबेर की विधिवत पूजा के साथ इस मंत्र का जाप करना चाहिए. ऐसा करने से व्यक्ति को सुख, समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है.

ॐ यक्षय कुबेराय वैश्रवणाय धन धान्याधिपतये
धन धान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा..

शरद पूर्णिमा के दिन चंद्र देव 16 कलाओं से परिपूर्ण होते हैं. इस दिन इसकी पूजा करने और इस मंत्र का जाप करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम ।
नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणं।।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. ओपोई इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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