Masik Durgashtami Puja Samagri List: प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को दुर्गाष्टमी व्रत किया जाता है. इस खास अवसर पर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है. जिस तरह से चतुर्थी तिथि का अधिष्ठाता भगवान गणेश को माना गया है. उसी प्रकार से दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा की विशेष पूजा की जाती है. इस बार मासिक दुर्गाष्टमी 27 फरवरी 2023 को है. हिंदू मान्यता के अनुसार, जो इंसान इस दिन विधि-विधान से मां दुर्गा की उपासना करता है. उसकी सभी मनोकामना पूरी होती है और साथ ही जीवन के कष्ट दूर होते हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. इस लेख में हम आपको बताएंगे दुर्गाष्टमी पूजा में किन चीजों को शामिल करना चाहिए और साथ ही जानेंगे शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में.

यह भी पढ़ें: Wall Clock Vastu: घर में इस दिशा में लगाएं दीवार पर घड़ी, चमक उठेगी आपकी किस्मत

मासिक दुर्गाष्टमी पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट (Masik Durgashtami Puja Samagri List)

घी/ तेल, धूप, नारियल, साफ चावल, कुमकुम, फूल, लाल चुनरी, लाल वस्त्र, मौली, देवी की प्रतिमा या फोटो, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, बताशे या मिसरी, श्रृंगार का सामान, दीपक, कपूर, फल-मिठाई और कलावा.

यह भी पढ़ें: Sheetala Ashtami 2023: कब हैं शीतला अष्टमी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

मासिक दुर्गाष्टमी शुभ मुहूर्त (Masik Durgashtami Shubh Muhurat)

फाल्गुन माह में 27 फरवरी 2023 दिन सोमवार को दुर्गाष्टमी व्रत किया जाएगा. दुर्गाष्टमी की शुरुआत 26 फरवरी 2023 दिन रविवार को रात्रि 4:40 पर होगी और इस तिथि का समापन इसके अगले दिन 27 फरवरी 2023 दिन सोमवार को रात्रि 3:00 बजे होगा.

मासिक दुर्गाष्टमी पूजा- विधि (Masik Durgashtami Puja Vidhi)

-दुर्गाष्टमी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और पूजा के स्थान पर गंगाजल डालकर उसकी शुद्धि करें.
-अब घर के मंदिर में दीपक प्रज्वलित करें.
-इसके बाद मां दुर्गा का गंगा जल से अभिषेक करें.

यह भी पढ़ें: Paan Ke Upay: पान के पत्ते के ये टोटके दिलाएंगे हर काम में सफलता

-मां दुर्गा को सिन्दूर,अक्षत और लाल पुष्प अर्पित करें, प्रसाद के रूप में फल और मिठाई का भोग लगाएं.
-दीपक और धूप जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और आरती करें.
-मां दुर्गा के भोग में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भगवान को केवल सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. ओपोई इसकी पुष्टि नहीं करता है.)