जैसे ही करवा चौथ (Karwa Chauth) आने वाला होता है, तो महिलाएं जोरों-शोरो से तैयारियां शुरु कर देती हैं. इस दिन पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखा जाता है और सोलह श्रंगार किए जाते हैं. मान्यता है कि कुंवारी कन्याएं मनोनुकूल पति की प्राप्ति के लिए इस दिन निर्जला व्रत रखकर तारों को देखेंगी फिर व्रत खोलेंगी. करवा चौथ के व्रत में महिलाएं दोपहर के समय में पूजा करती हैं और इससे जुड़ी व्रत कथा पढ़ती हैं, तो चलिए जानते हैं करवा चौथ की व्रत कथा. 

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करवा चौथ की कहानी (Karwa Chauth Ki Katha)

करवा चौथ की कहानी है कि देवी करवा अपने पति के साथ तुंगभद्रा नदी के पास रहती थीं. एक दिन करवा के पति नदी में स्नान करने गए तो एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया और नदी में खींचने लगा. मृत्यु करीब देखकर करवा के पति करवा को पुकारने लगे. करवा दौड़कर नदी के पास पहुंचीं और पति को मृत्यु के मुंह में ले जाते मगर को देखा.

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जब करवा ने अपने पति को मगरमच्छ के मुंह में देखा, तो उसने कच्चे धागे से मगरमच्छ को पेड़ से बांध दिया. इस दौरान उसके पति की जान खतरे में थी. करवा ने यमराज को पुकारा और उनसे बात की और पूछा, कि मेरे पति को छोड़ दें. यमराज ने करवा का जवाब देते हुए कहा कि अभी तुम्हारे पति की मृत्यु का समय है. करवा ने गुस्सा होकर कहा कि मैं तुम्हें श्राप दूंगी, नहीं तो मेरे पति को छोड़ दो.

ऐसा देखकर यमराज डर गया और उसने कहा कि मैं करवा के पति को छोड़ दूंगा. सलिए करवाचौथ के व्रत में सुहागन स्त्रियां करवा माता से प्रार्थना करती हैं कि हे करवा माता जैसे आपने अपने पति को मृत्यु के मुंह से वापस निकाल लिया वैसे ही मेरे सुहाग की भी रक्षा करना.

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कब है करवा चौथ?

करवा चौथ का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को  मनाया जाता है. इस साल करवा चौथ की तिथि 13 अक्टूबर को रात 01 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 14 अक्टूबर को सुबह 03 बजकर 08 मिनट पर समाप्त होगी. उदयातिथि के अनुसार करवा चौथ का उपवास 13 अक्टूबर को ही रखा जाएगा.