हिंदू धर्म में कालाष्टमी व्रत (kalashtami Vrat) को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है. इस महीने यह व्रत 17 अक्टूबर 2023 दिन सोमवार को पड़ रहा है. कहा जाता है कि इस व्रत में भगवान शंकर (Bhagwan Shankar) के भैरव रूप की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि भैरव (Bhairav) के तीन रूप होते हैं- काल भैरव, बटुक भैरव, और रूरू भैरव. कालाष्टमी व्रत वाले दिन भैरव के काल भैरव रूप की पूजा की जाती है. माना जाता है कि इस व्रत को करने से जीवन की सारी परेशानियां खत्म हो जाती हैं और भक्त की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं. जानें इस व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत मंत्र.

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 कालाष्टमी व्रत तिथि  

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 17 अक्टूबर को सुबह 09:29 से शुरू होगी और अगले दिन 18 अक्टूबर मंगलवार को सुबह  11:57 मिनट पर समाप्त होगी. इसके अनुसार कालाष्टमी का व्रत 17 अक्टूबर को रखा जाएगा और इस व्रत का पारण 18 अक्टूबर मंगलवार को किया जाएगा.

कालाष्टमी व्रत 2022 मुहूर्त

-कालाष्टमी व्रत 2022 : 17 अक्टूबर दिन सोमवार

-कार्तिक कृष्ण अष्टमी प्रारम्भ : 17 अक्टूबर को  सुबह 09:29 मिनट पर  

-कार्तिक कृष्ण अष्टमी समाप्त : 18 अक्टूबर 2022 को  सुबह 11:57 मिनट पर.

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कालाष्टमी व्रत 2022 पूजन विधि

-कार्तिक माह की अष्टमी तिथि को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि कर साफ कपड़ा पहन लें.

-अपने घर के पास के शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करें.

– यदि घर में ही कालाष्टमी व्रत की पूजा करना चाह रहें हैं, तो घर के पूजा स्थल पर काला आसन बिछाकर उसके ऊपर भगवान शिव की प्रतिमा के साथ में माता पार्वती और गणेश की प्रतिमा स्थापित करें.  

– विधि विधान से पूजा अर्चना करें, और काल भैरव को पूजन सामग्री अर्पित करें तथा दीपक जलाएं.

-फिर कालाष्टमी व्रत मंत्र का जाप करें, और इसके बाद आरती करें. मान्यता है कि इससे समस्त भय को हरने वाले बाबा काल भैरव की कृपा प्राप्त होगी. घर धन-धान्य से परिपूर्ण होगा.

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कालाष्टमी व्रत मंत्र

शिवपुराण में कहा गया है कि कालाष्टमी व्रत में कालभैरव की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जप करना बेहद फलदायी माना गया है. इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है.

मंत्र:

-अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्, भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि!

-ओम भयहरणं च भैरव:।

-ओम कालभैरवाय नम:।

-ओम ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं।

-ओम भ्रं कालभैरवाय फट्।

ऊपर दिए गए सभी मंत्र बेहद फलदायक हैं, यदि कालाष्टमी व्रत वाले दिन इन में से किसी भी मंत्र का जाप करके काल भैरव की विधि-विधान से पूजा की जाए तो भक्त के सभी दुःख दूर हो जाते हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. ओपोई इसकी पुष्टि नहीं करता है.)