हिंदू धर्म में महिलाओं के लिए हरतालिका तीज व्रत (Hartalika Teej 2022) बेहद खास है. यह व्रत सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखद वैवाहिक जीवन और उनके कल्याण के लिए रखती हैं. वहीं कुवांरी कन्यायें हरतालिका तीज व्रत (Hartalika Teej 2022 Vrat) सुयोग्य और मनचाहा वर प्राप्ति के लिए करती हैं.

इस व्रत में वे भगवान शिव और माता पार्वती की विधि –विधान से पूजा करती हैं. धार्मिक मान्यता है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए उपवास रखा था और यह दिन उनके मिलन का प्रतीक है. हरतालिका तीज का त्योहार (Hartalika Teej 2022 Tyohar) मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में मनाया जाता है.

यह भी पढ़ें: Chhattisgarh Pola Festival 2022: कब है पोला? जानें कैसे मनाते हैं ये खास त्योहार

हरतालिका तीज कब है?

पंचांग के मुताबिक, हरतालिका तीज व्रत हर साल भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. इस साल यह व्रत 30 अगस्त 2022 दिन मंगलवार को रखा जाएगा. इस व्रत में सुहागिन महिलाएं 16 श्रृंगार करके भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा अर्चना करती हैं और उन्हें 16 श्रृंगार की चीजों के साथ अन्य वस्तुएं अर्पित करती हैं. मान्यता है कि इन चीजों के साथ पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है. आइये जानें इनकी पूजा में किन-किन चीजों की आवश्यकता होती है.

यह भी पढ़ें: Chanakya Niti: घर में दिखने लगे ये संकेत, तो समझ लें बुरा समय हो सकता है शुरु

हरतालिका तीज व्रत की पूजा विधि

पूजा से पहले भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की बालू रेत या काली मिट्टी से प्रतिमा बनाई जाती है. इसके बाद पूजा स्थल को फूलों से सजाया जाता है और वहां एक चौकी जरूर रखें. उस चौकी पर केले के पत्ते बिछा लें. पत्तों पर भगवान शंकर, माता पार्वती और गणेश भगवान की प्रतिमा रखें. इसके बाद माता पार्वती, भगवान शिव और गणेश जी की विधि विधान पूजा करें. 

यह भी पढ़ें: Shani Amavasya 2022: शनि के साढ़े साती से हैं परेशान तो अपनाएं ये उपाय, होगा लाभ

फिर सुहाग की पिटारी माता पार्वती को चढ़ाएं. इस पिटारी में सुहाग की सारी वस्तुएं होनी चाहिए. भगवान शिव को धोती या अंगोछा चढ़ाएं. सुहाग सामग्री सास के चरण में स्पर्श कर ब्राह्मणी और ब्राह्मण को दान देना चाहिए. इस व्रत की कथा जरूर सुनें. इस व्रत के अगले दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा कर माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं व ककड़ी-हलवे का भोग लगाकर व्रत खोल लें.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. ओपोई इसकी पुष्टि नहीं करता है.)